auxiliary · Meet the Indians

कुछ होता नहीं, और कुछ होता भी नहीं

Helplessness : the times when we are so stuck that we cannot breathe neither can we stop breathing. Its like swallowing  the poison, in fragments to disturb every part of you, sulking and avoiding the facts and living under an impression which perhaps is not true.

It is one such piece, it is one such story of an Indian by another Indian.

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हर रोज़ की तरह आज भी वो निकल पड़े अपने काम पे,
गाड़ी की चाबी लगायी और इंतज़ार किया rider की request का..

*बीप बीप *

एक और नयी request, एक नया customer,
अलग अलग तरह के customer,
हसने वाले customer ,हँसाने वाले customer
रोते हुऐ customer, और रुलाने वाले customer
सब customer ही है लेकिन कितने अलग

आज फिर और एक दिन शायद कम हो गया
समझ नहीं आता , यह समय जो गुज़ार रहा है ,
यह मुझे मेरे अपनों से दूर ले जा रहा है ..
या मुझे उनके पास ला रहा है …
बिमारी ऐसी है न तो मैं जी पाता हु
और ज़िम्मेदारी ऐसी है की मैं मर भी नहीं सकता …

पापा .. पापा

school आज भी अच्छा ही था ..
lunch में पराठे थोड़े जले हुऐ थे , मगर मुझे बोहोत tasty लगे ..
कल भी आप ऐसे ही जले हुऐ पराठे बनाना …

समझ नै पाता मैं ,
मेरा बच्चा मुझे संभल रहा है या मई उसको ..

उसका छोटा कद , मासूम हसी और उछलते कूदते रहना
याद दिलाता है मुझको उसकी , जो मेरे साथ होती तोह शायद सब कुछ थोड़ा बेहतर होता
इलाज के पैसे शायद मैं फिर भी नहीं जुगाड़ पाता ,
लेकिन शायद थोड़ी ज़्यादा ख़ुशी जुगाड़ लेता ..

और एक दिन , और एक सवेरा ..
लेकिन आशा तोह आज भी नहीं है ..
रोज़ निकल पड़ता हु मैं ..
डर डर के , सहम के ..
कही आज ही तोह आखरी दिन नहीं मेरा ..

उसको फिर एक बार देख लेता हुआ ..
उसको फिर एक और बार गले लगा लेता हु ..
क्या पता ..
कल की उम्मीद आज शाम ही दफ़न हो जाये ?

वो जानता है ..
मेरी तकलीफ , उसे पता है मेरा गम
लेकिन वो कर भी क्या सकता है ..
मैं कमाता हु ..
बीमारी के इलाज के पैसे के लिए नहीं ..
बल्कि इसलिए .. ताकि उसे रोज़ खाना नसीब हो जाये ..
उसे तकलीफ न हो ..

तकलीफ होती है मुझे ,
लेकिन वो गम नहीं सेह पायूँगा अगर उसे मुस्कुराता हुआ न देख सकू …

आज तकलीफ बोहोत ज़्यादा है ..
मगर काम करना तोह ज़रूरी है ..

रोना आता है मुझे ..
लेकिन में रो भी नै सकता ..
कन्धा चाहता हु रोने के लिये ..
लेकिन कही जा भी नहीं सकता ..

सोचता हु सब ख़तम कर लू ..
सोचता हु सब ख़तम क्यों नै हो जाता अपने आप ..
खुदा की तरफ देखता हु तोह सोचता हु ..
क्या तुम में ताकत नहीं के कोई चमत्कार कर दो ?
और अगर इतनी ताकत नहीं .
तोह कम से कम मुझे मुक्ति ही दे दो ..
सारा दर्द भी ख़तम हो जायेगा ..

फिर वो याद आता है मुझे ..
और मैं सोचता हु ..

कुछ होता नहीं, और कुछ होता भी नहीं

I dont know how to help him, But if you know please let me hear about it.  He works as an uber driver with a strong heart with a pumping capacity of mere 15%.

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